Published On:Friday, January 31, 2014
Posted by NJFI media
वैष्णव देवी तक को धोखा
उज्जैन। देश का आदमी महा मक्कार धोखेबाज विश्वासघाती, लोभी, पाखण्डी व कू्रर हो गया है। सभी को धोखा देना उसकी नीति, नियत चरित्र व जीवन विधा हो गई है। माॅ वैष्ण देवी का भी धोखे व विश्वासघात का शिकार बनाया वैष्णों देवी में, स्वर्ण आभूषण चढाने की होड लगी रहती हैं। हाल ही में बैष्णों देवी के स्वर्ण भण्डार में 43 किलो नकली सोना पाया गया। माॅं वैष्णव देवी को धन, स्र्वण व रजत की चाह नहीं। वह तो भावनात्मक धार्मिक, संस्कारी व आत्मिक शुचिता चाहती है, किन्तु आदमी माॅं वैष्णो देवी तक को धोखा दे रहा है। ये माचरा क्या है। देश का आदमी अपने आराध्यों के साथ, छल, कपट, विश्वासघात कर रहा है। तो देश, समाज, व्यवस्था और इन्सानों को क्यो छोडेगे। भगवान तक को धोखा दे रहे है। अपनी कुटिलता, अहंकार व घिनौनेपन का खुले आम प्रदर्शन कर रहे है। ऐसा देश महापतन का शिकार होता ही है। भारत की यही स्थिति है। दोषी तो हम सब है क्यों की हमने अपनी जीवन वधिा और कला ही विश्वासघाती, आत्मा, संस्कार व आध्यात्मक भक्षक बना ली है। धिक्कार है सभी को ऐसी जीवन जीने इंन्सानों सुधरो, अन्यथा अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा।
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