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Published On:Thursday, January 16, 2014
Posted by NJFI media

भारत के बाघों और शेरों को कुत्तों से खतरा




भारत में पहले से ही शिकारियों का निशाना बन रहे बाघों के सामने एक और नया खतरा पैदा हो गया है. बाघों को खतरा अब कुत्तों से भी है.
ख्क्वहे इमबवउपदह जीम तमंस जमततवत वित जीम प्दकपंद जपहमते,

जी हां, कुत्तों से ही क्योंकि कुत्तों से फैलने वाला एक वाइरस, कैनाइन डिस्टेम्पर वाइरस, बाघों के लिए खतरा बन गया है.

बीते एक साल में कैनाइन डिस्टेम्पर वाइरस से कम से कम एक बाघ की मौत की पुष्टि हुई है. ये वाइरस टाइगर रिजर्व के आसपास के इलाके में मिलने वाले आवारा कुत्तों की त्वचा में होता है. अगर बाघ इस इलाके में घूम रहे किसी कुत्ते पर हमला करे और अगर कुत्ता संक्रमित हो तो ये वाइरस बाघ में चला जाता है.

भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान यानी आईवीआरआई के निदेशक गया प्रसाद का कहना है कि केन्या के सेरेंगेती और मसाई मारा में 20ः से 30ः शेरों की मौत ऐसे ही एक वाइरस की वजह से हुई थी.

मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर आर एस मूर्ति कहते हैं, ष्हमने वेटनरी कॉलेज के साथ मिलकर बीमारी निगरानी परियोजना शुरू की है क्योंकि हमारे यहां एक बाघ की मौत संदिग्ध हालत में हुई थी. उसमें कीड़े काफी ज्यादा थे.ष्

कुत्तों का टीकाकरण

बाघों के अस्तित्व पर आए इस संकट के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) भी हरकत में आया है.

एनटीसीए ने हाल ही में राज्यों को टाइगर रिजर्व के आसपास के इलाके में घूमने वाले पालतू या आवारा कुत्तों के टीकाकरण के निर्देश दिए हैं.

एनटीसीए के डायरेक्टर राजेश गोपाल ने बीबीसी से कहा, ष्पिछले जून से इस पर कार्रवाई चल रही है. टाइगर स्टेट्स को हम सलाह देते रहे हैं. वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट से मिलकर हिदायतें दी गई हैं. अभी तक एक ही बाघ की मौत सामने आई है जो कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से है.ष्

दुनिया के करीब 3200 बाघों में से आधे से ज्यादा भारत में हैं. बीमारियों और भूकंप जैसे प्राकृतिक कारणों की वजह से ही सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से कहा था कि वो एशियाई शेरों को मध्य प्रदेश के साथ भी बांटे.

आईवीआरआई भी इस वाइरस को गंभीर समस्या मानता है.

डॉक्टर गया प्रसाद ने कहा, ष्एक सैंपल हमारे पास दुधवा नेशनल पार्क से था और दूसरा सैंपल पश्चिम बंगाल से एक पांडा का था. दोनों में वाइरस पाया गया. ये वाइरस इतना खतरनाक है कि अगर ये वाइल्ड लाइफ रिजर्व में अगर फैल जाए तो बाघों के संरक्षण पर गंभीर असर पड़ सकता है.ष्

प्रसाद कहते हैं, ष्हमारा तो यही सुझाव है कि टाइगर रिजर्व के आसपास जितने कुत्ते घूम रहे हैं उन्हें टीके लगाए जाएं. वो अगर इम्यून हैं तो बीमारी नहीं फैला पाएंगे. चिड़ियाघरों में टीकाकरण किया जा सकता है.ष्

सिमटते जंगल
समस्या सिर्फ़ यहीं तक नहीं है. जंगल सिमट रहे हैं और ऐसे में बाघों के सामने शिकार की समस्या भी खड़ी हो रही है.

डॉक्टर प्रसाद कहते हैं, ष्बाघों को जब जंगल में कुछ खाने को नहीं मिलता तो वो बाहर निकलते हैं और कुत्ते मिले तो उन्हें भी मार देते हैं.ष्

बाघों में संक्रमण फैलने के बाद उनका इलाज बहुत मुश्किल है.

ष्बाघों को जब जंगल में कुछ खाने को नहीं मिलता तो वो बाहर निकलते हैं और कुत्ते मिलें तो उन्हें भी मार देते हैं.ष्
-डॉक्टर गया प्रसाद, डायरेक्टर, आईवीआरआई

डॉक्टर प्रसाद के मुताबिक ये वाइरस बाघों के नर्वस सिस्टम पर असर डालता है. वो कहते हैं, ष्बाघ कई बार रास्ता भूल जाते हैं, जंगल में जाने की जगह खेतों में चले जाते हैं. भटक जाते हैं.ष्

तो क्या बाघों के आदमखोर होने के पीछे ये वाइरस भी वजह हो सकता है?

डॉक्टर प्रसाद कहते हैं कि ये भी एक वजह हो सकती है. वो कहते हैं, ष्मेरे पास कोई सबूत नहीं है लेकिन दिमाग में जो बदलाव होते हैं उनकी वजह से भी हो सकता है कि वो जंगल से निकलकर गांवों की ओर चल पड़े.ष्

वजह चाहे जो हो लेकिन इतना साफ है कि अगर जल्दी ही बाघों को बचाने के लिए कदम नहीं उठाए गए तो उनके अस्तित्व पर सवालिया निशान लग सकता है.

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