Published On:Tuesday, February 18, 2014
Posted by NJFI media
व्यापम घोटाले की सीबीआय जाॅंच जरूरी क्यों की सरकार भी शरीक है।
उज्जैन। व्यापम घोआले राजकीय चेहरों का शातिर घोटालो है। मंत्री नौकरशाह, दलाल चेहरे शरीक है अब तो एटीएस के टेक्नीकल मैनेजर की लिप्ता भी स्पष्ट हो चुकी है निःसन्देह ए.टी.एस. ने निष्पक्ष जाॅंच की है। व्यापम् घोटाला 2010 में भी हुआ था। उसमें से कुछ लोगों के नाम भी उजागर हुआ हैं पूर्वमंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा केबिनेट में रहते हुए इसमें शरीक थे। संविधान के अनुसार मंत्रि परिषद् का आधार संयुक्त उत्तर दायित्व का होता है। अतः मुखिया शिवराजसिंह भी घोटाले हेतु जवाबदार तो है ही है। वे मुख्यमंत्री पद पर आसीन है अतः एटीएस उन पर शायद ही कार्यशाही करें।
न्यायालय न सीबीआय जाॅंच का आधार याचिका कर्ताओं से पूछा है। उपरोक्त तथ्य सीबीआय जांच का पर्याप्त आधार है। न्यायालय सामाजिक न्याय हेतु सीबीआय एवं एटीएस द्वारा संयुक्त रूप से जाॅंच का आदेश भी दे सकती है। एटीएस अपनी जांच कर रही है। और सीबीआय अलग से जाॅंच करें, दोनों एजेन्सीज की जाॅंच रपट की न्यायालय अध्ययन करे। संभव है जो तथ्य व साक्ष्य छुट गए हो उनकी प्रस्तुत सीबीआय जाॅंच मं सामने आ जाये। एटीएस व सीबीआय में प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि सत्य व साक्ष्य की प्रस्तुति ही होना चहिए। अनेक होनेहारों व योग्य प्रतिभाओं के साथ अन्याय हुआ है जिसकी क्षतिपूर्ति संभव ही नहीं है। संस्कृत बोर्ड में भी 600 फेल छात्रों को पास किया गया, मार्कशीट टेन्डर हैदराबाद का था वह भोपाल की मेहता प्रेस को क्यों व कैसे मिला। यह मामला भी अतिरोचक है यदि सीअबीआय व एटीएस संयुक्त जाॅंच करेगी तो जाॅंच जल्द पूर्ण होगी निष्पक्षता के साथ और ठोस सबूत भी प्राप्त होगे। प्रदेश भी जनता और प्रभावित योग्य छात्रां की भावनाओं की प्रस्तुति एनजेएफआई कर रहा हैं।


