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Published On:Friday, June 6, 2014
Posted by NJFI media

हॉलिडे

बॉक्स ऑफिस पर कमाई और कामयाबी के नए रेकॉर्ड बना चुके ‘गजनी’ के डायरेक्टर ए.आर. मुरुगादॉस के साथ अक्षय कुमार ने इस फिल्म को बनाने की डील करीब तीन साल पहले की थी। उस वक्त मुरुगादॉस इसी कहानी पर तमिल में ‘थुप्पकी’ बनाने की तैयारी में लगे थे। अक्षय चाहते थे मुरुगादॉस तमिल फिल्म शुरू करने से पहले इस कहानी पर हिंदी में फिल्म बनाएं, लेकिन बात नहीं बनी। साल 2012 में इस कहानी पर बनी ‘थुप्पकी’ रिलीज हुई। साउथ में फिल्म सुपरहिट होने के बाद पिछले साल इस प्रॉजेक्ट पर काम शुरू किया गया।
मुरुगादॉस का काम करने का अपना अलग स्टाइल है। जब तक उन्हें मनचाहा शॉट न मिले, तब तक रीटेक होते हैं। शायद इसी वजह से फिल्म को पूरा करने में कुछ ज्यादा ही वक्त लग गया। अब जब फिल्म दर्शकों के सामने है तो फिल्म में आपको कहीं कोई कमी नजर नहीं आएगी।

शुरुआती दस पंद्रह मिनट के बाद कहानी ऐसी रफ्तार पकड़ती है कि आप चाहकर भी हॉल से बाहर नहीं निकल पाएंगे। पिछले कुछ अरसे से चालू मसाला फिल्म करने में लगे अक्षय कुमार के लिए ऐसा किरदार जरूरी था, जो मसाला फिल्मों के चक्रव्यूह में फंसे अक्षय कुमार को इनसे कुछ दूर करने का काम कर सके। स्टार्ट टु एंड फिल्म अक्षय के कंधों पर टिकी है। डायरेक्टर मुरुगादॉस ने स्क्रिप्ट की डिमांड के मुताबिक, कहानी के दूसरे किरदारों को भी अच्छी फुटेज दी है। यूं तो मुंबई अटैक की पृष्ठभूमि पर अब तक कितनी फिल्में बन चुकी हैं, लेकिन पहली बार इस फिल्म में स्लीपर सेल को कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया है। बता दें, यह स्लीपर सेल वे लोग हैं जो आपके आस-पड़ोस में आम लोगों की तरह आपके साथ घुलमिल कर रहते हैं, लेकिन सीमा पार बैठे अपने आकाओं का इशारा मिलते ही बेगुनाह मासूमों की हत्याएं करने और दहशत फैलाने में लग जाते हैं। यूएसए में हुई आतंकी घटनाओं के बाद वहां की पुलिस और इंटेलिजेंस एंजेसियों ने सबसे पहले शहर से इन्हीं स्लीपर सेल्स का सफाया किया था।

कहानी: कैप्टन विराट बख्शी (अक्षय कुमार) जम्मू में तैनात है। लंबे अरसे बाद अब वह हॉलिडे लेकर अपनी फैमिली से मिलने मुंबई आया है। विराट की फैमिली ने पहले से उसकी झट शादी का प्लान बना रखा है। सो, स्टेशन से उसके पापा आर्मी ड्रेस में ही उसे लड़की दिखाने ले जाते हैं। साहिबा (सोनाक्षी सिन्हा) को देखकर विराट को लगता है, उसमें ऐसी खूबियां नहीं जो उसे अपनी लाइफ पार्टनर के लिए चाहिए। दरअसल, हाथों में चाय की ट्रे लिए लंबे बालों वाली सीधी-सादे लुक वाली साहिबा विराट को पसंद नहीं आती और वह इस रिश्ते से साफ इनकार कर देता है।

अगले दिन विराट मुंबई पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (सुमित राघवन) के साथ शहर में हो रही लड़कियों के बॉक्सिग मुकाबले में पहुचंता है। यहां आकर बॉक्सिंग रिंग में खड़ी साहिबा को देख विराट की आंखें फटी की फटी रह जाती हैं। विराट को अब पता चलता है कि सीधे-सादी दिखने वाली साहिबा एक बॉक्सर है। साहिबा की इस शख्सियत को देखने के बाद विराट फैसला करता है कि अब उसे साहिबा को ही अपना लाइफ पार्टनर बनाने के लिए राजी करना है।

मुंबई में इन्हीं दिनों एक बेहद खतरनाक साजिश रची जा रही है। इंडियन आर्मी में स्पेशल एजेंट विराट की आंखों के सामने एक बस में एक जबर्दस्त धमाके में बस में सवार स्कूली बच्चों के परखच्चे उड़ जाते हैं। विराट बम धमाके की इस साजिश को अपने ढंग से बेनकाब करने का फैसला करता है। बस में धमाका करने वाले एक आंतकी को विराट पकड़कर पुलिस को सौंपता है, लेकिन अगले ही दिन यह आतंकी पुलिस की कस्टडी से भागने में कामयाब हो जाता है। यहीं से विराट इस आतंकी सरगना के नेटवर्क में घुसने का प्लॉन बनाता है। विराट को पता लगता है अगले कुछ दिनों में स्लीपर सेल बारह अलग-अलग स्थानों पर बम धमाके की साजिश करेंगे। विराट का सामना एक ऐसे पढ़ेृ-लिखे, तेजतर्रार और लेटेस्ट तकनीक में माहिर आतंकियों के सरगना (फ्रेडी दारूवाला) से होता है, जो सीमा पार बैठे अपने आकाओं को खुश करने के लिए मुंबई को तबाह करने की साजिश में लगा है।

ऐक्टिंग: कैप्टन विराट बख्शी के किरदार में अक्षय कुमार ने अपनी शानदार ऐक्टिंग से जान डाल दी है। अक्षय की डायलॉग डिलिवरी, फेस एक्सप्रेशंस, हैरतअंगेज ऐक्शन… हर मोर्चे पर अक्षय ने अपनी महारत दिखाई है। सोनाक्षी के हिस्से में चंद ही सीन आए, लेकिन स्क्रीन पर सोनाक्षी जब भी नजर आईं, छा गईं। वहीं, इस तेज रफ्तार से भागती कहानी में बेशक कुछ ठहराव आता है, लेकिन सोनाक्षी की मौजूदगी दर्शकों को रिलैक्स जरूर कर देती है। सुमित राघवन ने अपने किरादर को अच्छे ढंग से निभाया है, वहीं फ्रेडी दारूवाला की एंट्री किसी सरप्राइज से कम नहीं। फ्रेडी ने अपने किरदार को ऐसे अंदाज में कैमरे के सामने पेश किया कि हर कोई उनकी बेहतरीन ऐक्टिंग का फैन हो जाता है।

डायरेक्शन: गजनी के बाद मुरुगादॉस ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। ए.आर मुरुगादॉस की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने लंबे अरसे से तीसमारखां, खिलाड़ी 786 और बॉस जैसी इमेज में बंधते जा रहे अक्षय कुमार को इस बार अपनी जीवंत ऐक्टिंग से आलोचकों का करारा जवाब देने का मौका दिया। करीब तीन घंटे की फिल्म में स्टार्ट टु एंड दर्शकों को बांध कर रखना आसान नहीं था, लेकिन मुरुगादॉस ने कहानी का ट्रैक कहीं हल्का नहीं पड़ने दिया। सोनाक्षी-अक्षय के चंद सीन्स को अगर इग्नोर कर दिया जाए, तो फिल्म कहीं आपको हॉल से बाहर जाने का मौका नहीं देती।

संगीत: ‘तू ही तो करार मेरा’ गाना म्यूजिक रिलीज में पहले से हिट है, वहीं फिल्म के दो और गानों का फिल्मांकन बेहतरीन है।

क्यों देखें: ‘गजनी’ फेम डायरेक्टर मुरुगादॉस का बेहतरीन वर्किंग स्टाइल, स्टार्ट टु एंड बांधने वाली कहानी, आंतकवादी घटनाओं में स्लीपर सेल का रोल, अक्षय की बेहतरीन ऐक्टिंग, फ्रेडी दारूवाला का अलग अंदाज, गजब ऐक्शन कई ऐसी खूबियां हैं, जो इस ‘हॉलिडे’ को खास बनाती हैं। काश, मुरुगादॉस अगर एडिटिंग टेबल पर बैठकर कुछ उन सीन्स पर कैंची चलाने की हिम्मत करते, तो हर क्लास की कसौटी पर यह ‘हॉलिडे’ फिट बैठता।

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