Published On:Tuesday, December 17, 2013
Posted by NJFI media
अन्ना-राहुल में जुगलबंदी से 'आप' असहज
- जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश को मजबूत लोकपाल के मुद्दे पर शुरू हुए आंदोलन ने सिर्फ सियासत ही नहीं बदली, बल्कि आपसी रिश्ते भी बदल दिए। जिन अन्ना हजारे के पीछे चलकर अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में सियासी उथल-पुथल मचा दी, वह अब अन्ना से दूर हो गए। वहीं, जो कांग्रेस दो साल पहले अन्ना की गिरफ्तारी की जिम्मेदार थी, उसके उपाध्यक्ष राहुल गांधी अब अन्ना के करीब हैं। पहले अन्ना तो बाद में राहुल ने चिट्ठी लिखकर एक-दूसरे की सराहना की। वहीं, आम आदमी पार्टी 'आप' नेता इस घटनाक्रम को 'फिक्स' मान रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे पर मुंह खोलने की हिम्मत नहीं कर पा रहे।
- रालेगणसिद्धि में फिर से लोकपाल के समर्थन में अनशन पर बैठे अन्ना ने संसद में पेश किए गए नए लोकपाल विधेयक का समर्थन किया। इसके उलट अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम इसे कमजोर विधेयक बताते हुए विरोध कर रही है। 'आप' के इस विरोध की हवा उनके अन्ना ने ही निकाल दी। उन्होंने न सिर्फ लोकपाल को मजबूत बताया, बल्कि राहुल को चिट्ठी लिखकर इसके लिए बधाई भी दी।
- लोकपाल के समर्थन में राहुल के खुलकर आने के बाद अन्ना ने उन्हें पत्र लिखा। इसमें अन्ना ने लिखा, 'संसद में लोकपाल एवं लोकायुक्त बिल पारित करने की आपकी प्रतिबद्धता का मैं स्वागत करता हूं। मेरा आग्रह है कि प्रवर समिति द्वारा सूचित एवं अनुमोदित बिंदुओं को बिल में शामिल किया जाए। इन बिंदुओं को प्रवर समिति में शामिल दलों ने सर्वसम्मति से तय किया है।'
- इसके जवाब में राहुल ने अन्ना को पत्र लिखा, जिसमें उन्हें धन्यवाद दिया और मजबूत लोकपाल के लिए प्रयास करने की बात कही। राहुल ने लिखा, 'आपके पत्र से मुझे बहुत प्रोत्साहन मिला। हम सब देश के लोगों को एक यथासंभव मजबूत व सक्षम लोकपाल व्यवस्था प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस कार्य में हम आपकी भूमिका का आदर करते हैं और आपके समर्थन के बहुत आभारी हैं।'
- अन्ना व राहुल के बीच इस जुगलबंदी ने सबसे ज्यादा 'आप' को असहज कर दिया। आप के नेताओं की दिक्कत है कि वह एक सीमा के बाद अन्ना के खिलाफ नहीं दिख सकते। यही कारण है कि लोकपाल से असंतुष्ट होने के बावजूद 'आप' के नेता ज्यादा कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं।


