Published On:Thursday, January 16, 2014
Posted by NJFI media
जहां पढ़ते हैं राजघरानों के बच्चे, 132 साल बाद वहां पढ़ेगा गरीब का बेटा
रायपुर. 132 साल में पहली बार हुआ। जिस कॉलेज में देश के राजघरानों, बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों के घर के बच्चे पढ़ते हैं, वहां पहली बार एक गरीब के बच्चे को प्रवेश मिल सका। ये इतनी आसानी से नहीं हुआ। अब्दुल कय्यूम देवंदिया को इसके लिए कानूनी लड़ाई लडऩी पढ़ी। राइट टू एजुकेशन के तहत वे लड़े और अपने बेटे मोहम्मद अनस को छत्तीसगढ़ के सबसे पुराने पब्लिक स्कूल में दाखिला दिलवाया। अब्दुल कय्यूम राजकुमार कॉलेज के पास ही रहते हैं। स्क्रीन प्रिटिंग का काम करते हैं। मामूली आय होती है। बहुत ज्यादा नहीं, बस इतना ही कि ले-देकर घर चल जाता है।
वे अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा देना चाहते थे।
इसलिए राजकुमार कॉलेज में उन्होंने उसे पढ़ाने का फैसला किया। लेकिन पैसे उतने नहीं थे। क्योंकि राजकुमार कॉलेज की फीस बहुत ज्यादा है। उसे उसके समाजसेवी दोस्त नजरूद्दीन चौहान ने बताया कि शिक्षा के अधिकार के तहत वे बच्चे को प्रवेश दिला सकते हैं। वे बच्चे को स्कूल लेकर गए। शिक्षा के अधिकार का हवाला दिया, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उन्हें चलता कर दिया। वे कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल से भी मिले, लेकिन आरकेसी प्रबंधन नहीं माना। तब कानूनी लड़ाई का सहारा लेना पड़ा।
डीईओ बंजारा के अनुसार यह एक विशेष मामला था। अभी कुछ और मामले हाईकोर्ट में लंबित हैं। आरटीई के तहत पब्लिक स्कूलों में 25 प्रतिशत जगह निर्धन बच्चों को देनी ही होगी। पिता अब्दुल, मां और दादी के साथ अनस पैदल ही स्कूल पहुंचा। उस स्कूल में जहां उसके सामने चमचमाती गाडिय़ों से बड़े घरानों के बच्चे उतर रहे थे।


