
पटना। बिहार
के राजनीतिक समीकरणों में एक बड़े बदलाव के तहत बीजेपी और रामविलास पासवान
की लोकजनशक्ति पार्टी के बीच चुनावी गठबंधन तय माना जा रहा है। बताया जाता
है कि पासवान आरजेडी-कांग्रेस-एलजेपी गठबंधन के ऐलान में हो रही देर से
परेशान होकर अब बीजेपी से हाथ मिलाने को तैयार हो गए हैं और जल्द ही गठबंधन
का औपचारिक ऐलान किया जा सकता है।
गौरतलब
है कि रामविलास पासवान पहले भी एनडीए का हिस्सा रह चुके हैं लेकिन गुजरात
दंगों के विरोध में उन्होंने एनडीए से इस्तीफा दे दिया था। अब वे फिर से
एनडीए का हिस्सा बनने का मन बना चुके हैं। पासवान बीजेपी के बड़े नेताओं के
संपर्क में हैं और सीटों के मुद्दे पर उनकी बातचीत जारी है।
कुछ
दिन पहले ही पासवान ने कहा था कि देश में मोदी की लहर है। झारखंड में
बोकारो स्टील प्लांट में कुछ नियुक्तियों को लेकर पासवान घेरे में हैं।
इसके बाद सुशील मोदी ने पटना में कहा कि राम विलास पासवान को फर्जी केस में
फंसाया जा रहा है।
पासवान का बीजेपी के
साथ जाना लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार दोनों के लिए बड़ा झटका है
क्योंकि लालू यादव उन्हें अपना भरोसेमंद सहयोगी मानकर चल रहे थे, वहीं कुछ
दिन पहले पासवान ने नीतीश से भी नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की थी। लेकिन
पासवान ने राजनीतिक नफा-नुकसान का आंकलन कर अंततः बीजेपी के साथ जाना ही
बेहतर समझा।
बिहार में जहां बीजेपी को
पासवान जैसे बड़े दलित नेता का साथ मिल रहा है, वहीं यूपी में भी उदित राज
बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। जस्टिस पार्टी के नेता उदित राज सोमवार को
बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल होंगे।
पासवान
और उदित राज के साथ मिलकर बीजेपी दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश
करेगी। ये वो वर्ग है जहां बीजेपी की पहुंच ज्यादा नहीं है और इस वर्ग के
लोग बीजेपी के परंपरागत वोटर नहीं माने जाते।
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